आधुनिक समय में कृषि जल निकास की आवश्यकता और महत्व


परिचय- फसल उत्पादन के दौरान अनावश्यक अतिरिक्त जल को कृत्रिम तरीको से खेत के बाहर निकालना जल निकास कहलाता हैं। जल निकासी (भूमि जल निकासी) न केवल सतह या उप-सतह से अतिरिक्त पानी को हटाने के लिए आवश्यक है बल्कि मिट्टी से लवण को हटाने के लिए भी जल निकास की प्रक्रिया चलन में हैं। भूमि जल निकासी भूमि से अतिरिक्त सतह और उपसतह के पानी को हटाने से फसल की वृद्धि को बढ़ाने के लिए है, जिसमें मिट्टी से घुलनशील लवण को हटाना शामिल है। जल निकास को सामान्य तौर पर भूमि जल निकास, कृषि जल निकास और क्षेत्र जल निकास के रूप में जाना जाता है। खरीफ मौसम (बरसात का मौसम) शुरू होने पर निचले स्तर के क्षेत्र में जल निकासी की मांग बढ़ जाती है।

भारत में जल निकासी की समस्या :-
कई देशों में, विशेष रूप से विकासशील देशों में, स्थायी कृषि उत्पादन में जल जमाव और नमक का संचय प्रमुख समस्याएं हैं। भारत में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में जल निकासी की समस्या तीव्र है, आमतौर पर जलभराव एक कृषि भूमि की स्थिति है जब उच्च वर्षा या गहन सिंचाई के कारण जड़ क्षेत्र संतृप्त हो जाता है। कुछ महत्वपूर्ण प्राकृतिक कारणों में वर्षा ऋतु के दौरान उच्च वर्षा, प्रतिकूल स्थलाकृति, लंबी शुष्क अवधि के दौरान उच्च वाष्पीकरण और मिट्टी के लवण होते हैं।

जल निकासी प्रणाली की आवश्यकता :-
फसल के सफल उत्पादन के लिए हमें खरीफ मौसम में खेतों में जल की अधिकता होने की वजह से जल निकासी की आवश्यकता होती है। खेतों में जलजमाव और लवणता के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पाते हैं और फसलों में लंबे समय तक जलभराव के कारण पौधे स्थायी रूप से मुरझा जाते हैं और साथ ही फसलों में उचित जल निकासी नहीं होने से फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए जड़ क्षेत्र से अतिरिक्त जल को जल निकास प्रणाली की सहायता से खेत के बाहर निकालकर जड़ो को उपयुक्त दशा प्रदान की जाती हैं जो फसल उत्पादन को बढ़ावा देता हैं।

भूमि से जल निकासी की आवश्यकता कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण होती है जो इस प्रकार हैं:
1. खेत में सख्त परत होने के कारण पानी नीचे जमीन में नहीं जा पाता है।
2. मिट्टी से अतिरिक्त जमा जल को हटाने के लिए जल निकासी आवश्यक हो जाती है।
3. यह आवश्यक है क्योंकि दोमट मिट्टी और काली मिट्टी में पानी भिगोने की प्रक्रिया काफी धीमी होती है।
4. कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें लंबे समय तक पानी में जीवित नहीं रह सकती हैं।

जल निकासी का महत्व :-
खरीफ मौसम और भारी सिंचाई में जल निकासी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि मिट्टी और जड़ क्षेत्र में उपयुक्त वायु संचार हो सके। जल निकासी की मदद से पानी एकत्र किया जा सकता है और इसे शुष्क मौसम की अवधि के दौरान भविष्य में उपयोग के लिए बचाया जा सकता है।

जल निकासी के अन्य महत्वपूर्ण हैं:
1. जब किसी क्षेत्र से अतिरिक्त पानी हटा दिया जाता है तो मिट्टी में वायु परिसंचरण बढ़ जाता है।
2. जल की निकासी होने से हानिकारक लवण जमीन से बह जाते हैं और भूमि को बंजर होने से बचाया जा सकता है।
3. मिट्टी की भौतिक स्थिति में सुधार होता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है।
4. मृदा वातन स्थिरता के कारण जड़ों की श्वसन क्रिया ठीक से नहीं हो पाती है। इसलिए पौधे मर जाते हैं।

Mr. Ravi Kr. Mahour, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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