एलोवेरा (Aloe Vera (Linn.) Burm.F.) का औषधीय महत्व


एलोवेरा क्‍या है? (What is Aloe Vera?)
एलोवेरा का पौधा छोटा होता है। इससे पत्‍ते मोटे, गूदेदार होते हैं। पत्ते चारो तरफ लगे होते हैं। एलोवेरा (Aloe Vera) के पत्‍ते के आगे का भाग नुकीला होता है। इसके किनारों पर हल्‍के कांटे होते हैं। पत्‍तों के बीज से फूल का दंड निकलता है जिस पर पीले रंग के फूल लगे होते हैं।

एलोवेरा एक औषधीय पौधा है जिसे घृतकुमारी, कवागदल, ग्वारपाठा आदि नामों से जाना जाता है यह प्राचीन काल से ही औषधि के रूप में काम में लेते हैं। एलोवेरा हमें हर घर में देखने को मिलता है इसे सब सजावटी पोधे के रूप में काम में लेते हैं। एलोवेरा बहु वर्षीय पौधा है। एलोवेरा लिलीएसी कुल से संबंधित है एलोवेरा के पौधे की लंबाई 1 से 2 फीट होती है इसकी पत्तियां लंबी कांटेदार व जूसी प्रकार की होती है इसकी पत्तियां 25 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती है इसके फूल छोटे वह गुलाबी रंग के होते हैं इसके पौधे को जून-जुलाई या सितंबर अक्टूबर में लगाया जाता है।

भारत के अलग-अलग प्रदेशों में एलोवेरा की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। मुख्यतया: दो प्रजातियों का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष तौर पर प्रयोग किया जाता है जो ये हैं:-
Aloe vera (Linn.) Burm. f.-
Aloe abyssinica


अन्य भाषाओं में एलोवेरा के नाम (Name of Aloe Vera in Different Languages)
एलोवेरा का वानस्‍पतिक नाम Aloe vera (Linn.) Burm.f. (एलोवेरा)? Syn-Aloe barbadensis Mill. है, और इसके अन्य ये भी नाम हैं:-

Hindi – घीकुआँर, ग्वारपाठा, घीग्वार
English – एलो वेरा (Aloe vera), कॉमन एलो (Common aloe), बारबडोस एलो (Barbados aloe), मुसब्बार (Musabbar), कॉमन इण्डियन एलो (Common Indian aloe)
Sanskrit – कुमारी, गृहकन्या, कन्या, घृतकुमारी
Kannada – लोलिसर (Lolisar)
Gujarati – कुंवार (Kunwar), कड़वी कुंवार (Kadvi kunvar)
Tamil – कत्तालै (Kattale), अंगनी (Angani), अंगिनी (Angini)
Telugu – कलबन्द (Kalband), एट्टाकलाबन्द (Ettakalaband)
Bengali – घृतकुमारी (Ghritkumari)
Nepali – घ्यूकुमारी (Giukumari)
Punjabi – कोगर (Kogar), कोरवा (Korwa)
Malayalam – छोट्ठ कथलाइ (Chotthu kathalai)
Marathi – कोरफड (Korphad), कोराफण्टा (Koraphanta)
Arabic – तसाबार अलसी (Tasabrar alsi), मुसब्बर (Musabbar)
Persian – दरखते सिब्र (Darkhate sibre), दरख्तेसिन (arkhteesinn)


एलोवेरा की खेती :-
आजकल घृत कुमारी की खेती एक बहुत बड़े स्तर पर एक सजावटी पौधे के रूप में की जा रही है। अलो वेरा को आधुनिक उत्पादक इसके औषधीय गुणों के कारण उगा रहे हैं। इसकी सरसता इसे कम वर्षा वाले प्राकृतिक क्षेत्रों में जीवित रहने में सक्षम बनाती है, जिसके चलते यह पठारी और शुष्क क्षेत्रों के किसानों में बहुत लोकप्रिय है। घृत कुमारी हिमपात और पाले का सामना करने में असमर्थ होता है। आमतौर पर यह कीटों का प्रतिरोध करने में सक्षम होता है पर कुछ कीट जैसे मीली बग, पटरी कीट और एफिड कीड़ों के कारण पादप की वृद्धि में गिरावट आ सकती है। गमले में पौधों के लिये बालुई मिट्टी जिसमे पानी का निकास अच्छा हो तेज खिली धूप की स्थिति आदर्श होती है। आमतौर पर इन पौधो के लिये टैराकोटा के गमले क्योंकि यह छिद्रयुक्त होते हैं और अच्छी गुणवत्ता की खाद की सिफारिश की जाती है। सर्दियों के दौरान घृत कुमारी सुषुप्तावस्था में पहुँच जाती है और इस दौरान इसे बहुत कम नमी की आवश्यकता होती है। हिम या तुषार संभावित क्षेत्रों में पौधों को अन्दर या पौधाघर (ग्रीनहाउस) में रखना अच्छा रहता है। सौंदर्य प्रसाधन उद्योग के लिये अलो वेरा जैल की आपूर्ति के लिये घृत कुमारी का बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, डोमिनिक गणराज्य, भारत, जमैका, दक्षिण अफ्रीका और केन्या के साथ संयुक्त राज्य अमरीका में भी होती है।

ऐलोवेरा में उपलब्ध पोषक तत्व:-
एलोवेरा में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं तथा साथ ही विटामीन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, फोलिक एसिड, कोलीन बी1, बी2, बी3 और बी6 पाया जाता है। एलोवेरा विटामिन बी12 वाले पौधों से भी संबंधित है और इसमें कैलशियम, जिंक, क्रोमियम, सेलेनियम, सोडियम, आयरन, पोटैशियम, कॉपर और मैग्नीशियम आदि को मिलाकर कुल 20 प्रकार के मिनरल्स पाए जाते हैं।

एलोवेरा के पौधे का उपयोग:-

  • एलोवेरा की पत्तियां ,फूल , जड़ वह जूस का उपयोग औषधि दवाइयां सौंदर्य प्रसाधन में किया जाता है ।
  • एलोवेरा का अधिकतर उपयोग एलोवेरा जूस के रूप में किया जाता है । जो कई प्रकार की बीमारियों से मुक्त करवाता है।
  • ऐलोवेरा का रस प्रमुख बीमारियाँ जैसे बवासीर, डायबिटीज और पेट की परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता है
  • एलोवेरा कब्ज की समस्या को भी खत्म करता है रोज सुबह एक गिलास एलोवेरा जूस का सेवन करने से पुरानी कब्ज ठीक हो जाती है ।
  • एलोवेरा में एमिनो एसिड की मात्रा भरपूर होती है जो एलर्जी को दूर करता है।
  • एलोवेरा के पत्तों के रस के सेवन से भूख में सुधार होता है और पाचन में मदद मिलती है।
  • एलोवेरा जूस में चीनी मिलाकर पीने से खांसी जुकाम ठीक होता है ।

सौंदर्य प्रसाधन में एलोवेरा का उपयोग:-
आजकल सौंदर्य प्रसाधन में एलोवेरा का बहुत तेजी से उपयोग किया जाता है जैसे: –
1. एलोवेरा का इस्तेमाल जेल, बॉडी लोशन, हेयर जेल, स्किन जेल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम, ब्यूटी क्रीम, हेयर स्पा, इत्यादि के निर्माण में भी किया जाता है।
2. एलोवेरा के जैल उपयोग मुहासे, रूखी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग – धब्बे और आंखों के काले घेरों के लिए तथा गंजेपन को दूर करने के लिए इस्तेमाल करते है ।

एलोवेरा के ज्यादा सेवन से होने वाली बीमारियां:-
1. एलोवेरा की लंबे समय तक की अवधि के लिए सेवन स्यूडोममेलाइसोसकोली का कारण हो सकता है यह कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ा देता है।
2. एलोवेरा रस की अधिक मात्रा में लेने से श्रोनी में रक्त का निर्माण हो सकता है जिससे आपके गुर्दे को नुकसान हो सकता है।
3. एलोवेरा जूस का सेवन करने से ब्लड प्रेशर लो हो जाता है तथा जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो रहता है उन्हें एलोवेरा जूस के सेवन नहीं करना चाहिए ।

ऐलोवेरा का उपयोग करने के लिए ध्यान रखने वाली बातें:-
1. हमें बिना डॉक्टर की सलाह लिए एलोवेरा जूस का उपयोग नहीं करना चाहिए।
2. अगर हम एलोवेरा जेल का उपयोग सुंदरता को बढ़ाने के लिए करते हैं और उससे हमें खुजली या जलन या पिंपल्स अधिक होते हैं तो हमें इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

Dr. Manoj Kumar Jangid, Associate Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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