गिलोय का औषधीय महत्व एवं अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान


गिलोय का इतिहास- सदियों से इस पौधे का प्रयोग होते आ रहा है। गिलोय एक भारत का औषधी युक्त पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में कई बिमारियों के उपचार में उपयोग होता है। पुराने हिन्दू चिकित्सक ने इसे गोनोरिया के लिए, भारत में यूरोपीयन इसे टॉनिक और मूत्र वर्द्धक के रूप में इस्तेमाल करते थे। भारत के फार्मा कंपनियों में इसे आधिकारिक रूप से मान्यता मिली हुई है, जिससे दवा का निर्माण कर विभिन्न रोगों में जैसे की सामान्य कमजोरी, बुखार, अपच, पेचिश, गोनोरिया, मूत्र रोग, हेपेटाइटिस, त्वचा रोग और एनीमिया के इलाज इत्यादि के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके लतिका के जड़ का उपयोग भी आंत की बीमारी में किया जाता है। आयुर्वेद में इसके अनेक नाम है, जैसे की चक्रांगी और अमृता। यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है कि यह आयुर्वेदिक दवाओं का एक महत्वपूर्ण घटक इसके बिना आयुर्वेद में अभ्यास संभव नहीं हो सकता है। यह ज्यादातर उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है जिनमे यह भारत, म्यांमार और श्री लंका में भी पाया जाता है। यह एक मेनिस्पेर्मसाए नामक परिवार से तालुक रखता है जो की एक बेल लता वाली होती है, और उनका इस्तेमाल खाने के साथ ही जडी बुटी के लिए भी किया जाता है। कोरोनाकाल में लोगों का रुझान आयुर्वेद में बढ़ गया है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोग गिलोए का बेहद इस्तेमाल कर रहे हैं। गिलोय का इस्तेमाल प्राचीन काल से ही दवाओं में किया जाता रहा है। गिलोए सेहत का खज़ाना है। एक बहू वर्षीय लता होती है यह नीम के पेड़ पर चढता है जो गुणकारी है । इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं । इनकी पतियो में क्षार की मात्रा बहुत कम पाई जाती है । चिकनी एवं मांसल लता बहुत विस्तार से वृक्षों पर फेल जाती है। इसके तने में चक्राकार आकृति बनती है इसकी यह मुख्य पहचान है । इसकी शाखाओ से डोर के समान शोरिया निकलकर भूमि की तरफ लटकती है इसका डंठल बड़ा होता हैं। गिलोय एक औषधीय लता होती है । आयुर्वेद शास्त्र में गिलोय को ज्वर/बुखार की एक उपयोगी औषधि मानते हैं जिसे जीवंती नाम दिया गया है और यह अमृत के समान गुणकारी होने से इसे अमृता नाम से भी जाना जाता है । इसके पत्ते पान के समान 2 से 4 इंच के घेरे में गोलाकार, नुकीले, चिकने, पतले होते हैं तथा शिराओं युक्त 1 से 3 इंच लंबे पर्णवृंत से युक्त होते हैं । इसमें पीले रंग के फूल आते हैं । इसके फल मटर के समान होते हैं जो गुच्छी में आते हैं और पकने पर लाल हो जाते हैं । इसके बीज टेड़े चिकने प्रकार के होते हैं।

अन्य भाषाओं में गिलोय के नाम:-
गिलोय की अलग-अलग भाषाओं में अलग अलग नाम से जाना जाता है। गिलोय का वानस्पतिक नाम:- Tinospora cordifolia
प्राचीन नाम :- गुडुची गिलोय
हिन्दी:- गिलोय गुलबेल
इंग्लिश:- टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया
संस्कृत में :- अमृता, चक्रांगी , कुदालिनी , छिन्नरूहा

गिलोय की खेती: गिलोय की खेती बहुत बड़े स्तर पर औषधीय पौधे के रूप में की जाती है। इसे औषधीय गुणों के कारण उगाया जा रहा है।

गिलोय में उपलब्ध पोषक तत्व: गिलोय में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं । गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट एंटी इफ्लेमेंटरी और कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं गिलोय में गिलोइन नाम का ग्लूकोसाइड, पामेरिन, टिनोस्पोरिन, टिनोस्पोरिक अम्ल पाए जाते हैं। साथ ही इसमें आयरन, फॉस्फोरस, कॉपर, कैल्शियम, जिंक एवं मैंगनीज जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।

गिलोय के पोधे का उपयोग:-
गिलोय के पौधे की पत्तियां, जड़, तना आदि का उपयोग औषधि के रूप में काम में लिया जाता है। गिलोय का अधिकतम उपयोग इसके तने का किया जाता है जो कई प्रकार की औषधियां/दवाइयां बनाने के काम में लिया जाता है। गिलोय से कई प्रकार के प्रोडक्ट बनाए जाते है जैसे जूस, गोलियां आदि जो अनेक बीमारियों को नष्ट करने में उपयोगी है। इस औषधि का सेवन करने से पाचन क्रिया में सहायता मिलती है साथ ही भूख भी बढ़ाती है और आंखों के लिए भी लाभकारी होती है। गिलोय का इस्तेमाल से जलन, डायबिटीज व पीलिया रोग से मुक्ति में लाभकारी हैं। इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है और बुखार, उल्टी, सूखी खांसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग से छुटकारा पाने में भी प्रयोग की जाती है। गिलोय जोड़ो के दर्द, हड़ियो को मजबूत बनाने के लिए तथा चिकनगुनिया के लिए बहुत उपयोगी है। गिलोय के काढ़े का उपयोग भी किया जाता है जिससे से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर भी गिलोय का सेवन किया जाता है जिससे काफी तेजी से प्लेटलेट्स बढती है। गटिया रोग में भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है।

गिलोय के ज्यादा सेवन से होने वाले नुकसान: गिलोय के अत्याधिक फायदों को जानकर आपको लगता है कि इसके फायदे ही फायदे है। लेकिन अनगिनत फायदो वाले गिलोय का अत्याधिक इस्तेमाल आपको बीमार भी बना सकता है। इसके आपकी बॉडी पर साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि गिलोय के साइड इफेक्ट कौन-कौन से है।

1. ऑटो इम्यून रोगों का खतरा हो सकता है: गिलोय के इस्तेमाल से इम्यूनिटी मजबूत होती है, इसके अत्याधिक इस्तेमाल से इम्यूनिटी के अधिक सक्रिय होने से ऑटो इम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रुमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित मरीज गिलोय से परहेज करें।
2. ब्लड प्रेशर कम करता है: जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है वो गिलोय के सेवन से परहेज करें। गिलोय ब्लड प्रेशर को कम करता है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है।
3. सर्जरी से पहले गिलोय नुकसानदायक: आप किसी भी तरह की सर्जरी कराने जा रहे हैं तो गिलोय का सेवन नहीं करें। सर्जरी से पहले गिलोय का सेवन जानलेवा हो सकता है।
4. प्रेग्नेंसी में गिलोय नुकसानदायक: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी गिलोय से परहेज करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर की सलाह के बिना गिलोय का इस्तेमाल नहीं करें।
5. कब्ज कर सकता है अत्याधिक गिलोय: अगर आप गिलोय का अत्याधिक इस्तेमाल करेंगे तो आपको कब्ज की शिकायत हो सकती है। इसलिए गिलोय का सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें।

Ms. Anjali Dadhich, B.Sc. III Year, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

2 thoughts on “गिलोय का औषधीय महत्व एवं अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *