वर्मीवाश बनाने की विधि और उससे फायदें


परिचय- रसायनों के अधिक प्रयोग से अन्न की गुणवत्ता में गिरावट, खाद्य पदार्थों में जहरीलापन एवं हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। ऐसे में उपरोक्त समस्याओं से निदान पाने के लिए रसायनिक उत्त्पादों का प्रयोग कम करके उनके स्थान पर जैविक उत्पादों जैसे खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, वर्मीवाश इत्यादि का उपयोग कर मिट्टी एवं मनुष्यों के स्वास्थ्य को बनाये रख सकते हैं। वर्मीवाश शहद के रंग के जैसा एक तरल जैव खाद है, जिसका उत्पादन केंचुआ खाद उत्पादन के दौरान या अलग से भी किया जाता है। केंचुए का शरीर तरल पदार्थों से भरा होता है, एवं इनके शरीर से लगातार इनका उत्सर्जन होता रहता है। इस तरल पदार्थों का संग्रहण ही वर्मीवाश है। इसमें बहुत सारे पोषक तत्व, हार्मोन्स जैसे साइटोकिनीन, आक्सीटोसिन, विटामिन्स, एमिनो एसिड, एन्ज़ाइम्स, उपयोगी सूक्ष्मजीव जैसे बैक्टीरिया, कवक, एक्टीनोमाइसिटिस (नाइट्रोजन का स्थरीकरण करने वाले एवं फास्फेट को घुलनशील बनाने वाले) इत्यादि पाए जाते हैं। इसमें सभी पोषक तत्व घुलनशील रूप में उपस्थित होते हैं जो पौधों को आसानी से उपलब्ध होते हैं।

वर्मीवाश तैयार करने हेतु उपयोगी सामान :-
गोबर, मिट्टी, मोटी बालू, केंचुआ, पुआल या सूखा पत्ता, मिट्टी का घड़ा, पानी, बाल्टी, ड्रम, ईंट के छोटे टुकड़े या गिट्टी इत्यादि।
वर्मीवाश तैयार करने की विधि:

  • आवस्यकतानुसार वर्मीवाश की इकाई ड्रम, बाल्टी, या टंकी लें ।
  • अब ड्रम की सबसे निचली सतह पर 5-7 से०मी० ईंट या पत्थर की गिट्टी बिछा दें।
  • इसके ऊपर 8 -10 से०मी० मोरंग या बालू बिछा दें।
  • अब इसके ऊपर 12-15 से०मी० दोमट मिट्टी बिछाएं।
  • अब इसमें एपीजाइक केंचुए डाल दें।
  • इनके ऊपर 15-20 दिन पुराना गोबर का ढेर 30-40 से०मी० बिछा दें।
  • गोबर के ऊपर 5-10 से०मी० मोटी पुआल तथा सुखी पत्तियों की तह बना दें।
  • प्रत्येक तह को बनाने के बाद पानी डालें और नल की टोंटी खुला रखें।
  • मोटी पुआल व सुखी पत्तियों वाली सतह को 15-20 दिन तक शाम को पानी से गीला करें। इस प्रक्रिया में नल की टोंटी अवश्य खुली रखें।
  • 16-20 दिन के बाद इकाई में वर्मीवाश बनना शुरू हो जायेगा।
  • अब इस ड्रम के ऊपर मिट्टी का घड़ा लटका दें।
  • घड़े के निचे छेद करके उसमें कपड़े की बत्ती डाल दें, जिससे पानी बून्द-बून्द टपकता रहे।
  • शाम को घड़े में 4 ली० पानी भर दें।
  • प्रत्येक दिन प्रातः हमें 3 ली० वर्मीवाश तैयार मिल सकेगा।

Mr. Ravi Kr. Mahour, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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