किसानो के लिए पशुपालन की आवश्यक महत्वपूर्ण जानकारी


परिचय – प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में पशुपालन किया जा रहा है। पशुपालन के अंतर्गत पालतू पशुओं को दूध, घी, गोबर, माँस, बाल, चमड़ा इत्यादि के लिए पालते है। भारत के किसान या ग्रामीण लोग यह व्यवसाय करके महीनों के लाखों कमा कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते है। पशुपालन में घरेलू जानवर आते है जिनमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि आते है। भारत का किसान वर्ग ज्यादातर पशु पालता है। यह उसकी आमदनी का एक महत्वपूर्ण जरिया है। पशुओं के चारे, पानी और भोजन का प्रबंध, पशुओं के लिए बाड़े का प्रबंध, उनके स्वास्थ्य और प्रजनन की देखभाल आदि पशुपालन का हिस्सा है।

cattle farming
भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है लेकिन पशुपालन भी एक अहम हिस्सा है। पशुओं से प्राप्त होने वाला दूध एक महत्वपूर्ण पदार्थ है। भारत देश में सबसे ज्यादा दध उत्पादन होता है। भारत का उत्तरप्रदेश, बिहार राज्य सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करते है।

पशुपालन की जानकारी :
एक गरीब ग्रामीण परिवार के लिए पशु किसी धन से कम नही है। पशुओं से उन्हें दूध और गोबर मिलता है जिसे बेचकर उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो जाती है। गांवों में कई मजदूर और भूमिहीन लोग होते है जिनके लिए पशुपालन एक वरदान है। पशुपालन में केवल गाय या भैंस ही नही, भेड़ और मुर्गी भी आती है। भेड़पालन से ऊन प्राप्त होती है जो भी आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया है। मुर्गीपालन से अंडा और मांस मिलता है। सीमित या असीमित आय का एक बढ़िया जरिया हें पशुपालन शुरू करने से पहले अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस की नस्ल का चुनाव जरूरी है। विदेशी नस्ल की गायें देशी से अधिक मात्रा में दूध देती है। जर्सी नस्ल की विदेशी गाय सर्वोधिक दूध देती है। साहीवाल, गिर, नागौरी, मालवी इत्यादि गाय की मुख्य नस्लें है। मुर्रा नस्ल की भैंस भी सर्वोधिक दूध उत्पादन करती है। इसके अलावा भदावरी, निलिरावी, नागपुरी इत्यादि अन्य भैंस की नस्लें है।

एक आदर्श पशुपालन में मवेशियों की उचित देखभाल आवश्यक है।
1. पशुओं को हमेशा साफ सुथरे माहौल में रखना जरूरी है। अगर बाड़े का माहौल स्वच्छ नही है तो पशु बीमार हो सकते है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए।

2. पशुओं के लिए चारे का उचित प्रबंध आवश्यक है। पशुओं का मुख्य भोजन ही चारा है, इसलिए चारा प्रबंध जरूरी है। गाय, भैंस, बकरी इत्यादि सभी पशु चारा खाते है। पशुओं के भोजन की भी देखरेख करे। पशु के लिए साफ पीने के पानी का इंतजाम भी जरूरी है।

3. मवेशियों के लिए बाड़े का प्रबंध होना चाहिए। बाड़े में ताजी हवा आने का रास्ता होना जरूरी है। बाड़े में छप्पर भी होना जरूरी है क्योंकि सर्दी और बारिश के दिनों में उन्हें सुरक्षा मिलती है।

4. बीमारियों और रोगों से दूर रखने के लिए पशुओं को नहलाना भी जरूरी है। पशुपालन में मवेशियों को नहलाना एक नित्य क्रिया है। इससे उनके शरीर से परजीवी निकल जाते है।

5. समय समय पर पशुओं को उचित टीका लगाना जरूरी है। पशुओं पर भी जीवाणुओं, वायरस इत्यादि का प्रभाव होता है, इसलिए कई प्रकार की बीमारियां घर कर जाती है। ऐसी बीमारियों से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण जरूरी है।

पशुपालन का महत्व :
नर पशुओं का उपयोग खेती में किया जाता है। जैसे कि बेल का उपयोग खेत जोतने में होता है। पशुपालन के दौरान दूध निकालना भी आवश्यक होता है। गाय, भैंस या बकरी का दूध निकालने में समय अलग अलग लगता है। गाय, भैंस का दूध निकालने में ताकत और समझदारी आवश्यक है। बकरी का दूध निकालना इनकी तुलना में बहुत आसान है। साथ ही पशुपालन से ही डेयरी उद्योग का भविष्य है। डेयरी में दूध, पनीर, दही, घी इत्यादि पशुओं से ही मिलते है। वर्तमान में पशुपालन को कृषि विज्ञान के अंतर्गत छात्रों को पढ़ाया जाता है। भारत सरकार पशुपालन के लिए लोन भी देती है। और लोन पर सब्सिडी भी प्रधान की जाती हें|

Mr. Brahmanand Bairwa, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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