स्वदेशी सब्जियों का पोषण और औषधीय महत्व


परिचय- कई पारंपरिक या स्वदेशी सब्जियों को उच्च पोषण मूल्य की विशेषता है|,टमाटर और गोभी जैसी वैश्विक सब्जियों की तुलना में। जैसा आवश्यक विटामिन, सूक्ष्म पोषक तत्व, प्रोटीन और अन्य पादप पोषक तत्वों का प्रुमख स्रोत है पारंपरिक स्वदेशी सब्जियों में मुख्य रूप से परवल, छोटी ककड़ी,चुलिई, कुंदरू, ककरोल, पोयसाग,जिमीकंद,सहजन, पंखिया बीन, आदि आते है इनके अंदर प्रुमख रूप से सोडियम, तांबा, मैंगनीज, क्लोराइड ,फाइटो-रसायन जैसे फेनोलिक यौगिक के साथ आइसोथियोसाइनेट्स जिसमें मजबूत एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो की आयु बढने के साथ होने वाली बीमारियों उच्च रक्तचाप, कैंसर, मधुमेह आदि बीमारियों के साथ-साथ त्वचा के रोग, बुखार और कब्ज, झाइयों, झुर्रियों और बारीक रेखाओं को कम कर त्वचा में कसाव लाने में मदद करते हैं, खून साफ कर, कांतिमय बनाने में मदद करता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमा‍रियों से लड़ने में मदद करता है फोड़े, फुंसी और त्वचा संबंधी अन्य रोग ,कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। स्वदेशी सब्जी फसलें से उद्योगों में कई गुना रोजगार के अवसर,पैकेजिंग, भंडारण, संरक्षण, डिब्बाबंदी और परिवहन में वृद्धि होती है ।

इसलिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्वों की समुचित मात्रा शैशव अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हमारे भोजन में शामिल होनी चाहिए। ठीक ही कहा गया है कि ‘हम जो कुछ हैं, वह इस पर निर्भर है कि हम खाते क्या हैं’’ दूसरे शब्दों में ‘‘जैसा अन्न-वैसा मन’’। हमारे शरीर की संरचना हमारी खुराक पर निर्भर करती है। कोई अकेला भोजन ऐसा नहीं है, जो हमारी सभी पोषक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो। हमारा भोजन पौष्टिक तत्वों की दृष्टि से संतुलित होना चाहिए |

Dr. Rakesh Kumar Meena, Assosiate Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *