नीम लेपित यूरिया: कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण समाधान

परिचय – पौधों को कुल मिलाकर तीन प्रकार के 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। C,H,O के अलावा ये पोषक तत्व हैं| प्राथमिक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटैशियम), द्वितीयक (कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं सल्फर) तथा तृतीयक पोषक तत्व (बोरान, जिंक, मैग्नीज, आयरन, कॉपर, मॉलिब्डेनम, क्लोरीन एवं निकेल)। पौधों के विकास तथा प्रजनन के लिये नाइट्रोजन सबसे जरूरी पोषक तत्व है। पौधों की आवश्यकता के अनुसार ये सभी तत्व मृदा में उपलब्ध होते हैं। यदि इन तत्वों की मृदा में कमी पायी जाती है तो उसकी पूर्ति के लिये अलग से पोषक तत्व प्रदान किये जाते हैं। नाइट्रोजन की पूर्ति के लिये यूरिया सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। यूरिया में अन्य नाइट्रोजन स्रोतों की अपेक्षा सबसे अधिक (46%) मात्रा में नाइट्रोजन पाया जाता है। जब मृदा में यूरिया डाला जाता है तो वह सबसे पहले अमोनियम (NH4+) में बदल जाता है फिर जलीयकरण के बाद नाइट्राइट (NO2) और नाइट्रेट (NO3) में बदल जाता है। यह प्रक्रिया ‘नाइट्रीकरण’ कहलाती है। अधिकतर पौधे नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं। हालाँकि कुछ पौधे (जैसे – धान) अमोनिया (NH4+) के रूप में भी नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं। नाइट्रीकरण की प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि नाइट्रोजन की बहुत कम मात्रा ही पौधों को प्राप्त हो पाती है। नाइट्रोजन की शेष मात्रा निक्षालन तथा अन्तः स्रवण द्वारा जमीन में नीचे तथा किनारों में चली जाती है जिससे भूमिगत जल प्रदूषित हो जाता है तथा मृदा की प्रकृति भी खराब हो जाती है।
यूरिया से प्राप्त होने वाली नाइट्रोजन की इस क्षति को रोकने के लिये विभिन्न संस्थानों में शोध कार्य किये गये। शोधों के अच्छे परिणाम आए और कई प्रकार के स्लो रिलीज नाइट्रोजीनस फर्टिलाइजर तैयार किये गए। इनमें सल्फर कोटेड यूरिया तथा नीम कोटेड यूरिया प्रमुख हैं। इस लेख में नीम कोटेड यूरिया पर प्रकाश डाला जा रहा है। नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, दिल्ली ने नीम कोटेड यूरिया बनाने की शुरुआत की है।

क्या है नीम लेपित यूरिया?
नीम कोटेड यूरिया से अभिप्राय है साधारण यूरिया को नीम के तेल से आवरित करना। इस यूरिया में ट्राइटर्पीन्स तथा डीनाइट्रीफाइंग तत्वों की अधिकता रहती है। नीम कोटेड यूरिया के उपयोग से नाइट्रोजन मृदा में धीरे-धीरे समावेशित होती है इसका पोधे लम्बे समय तक नाइट्रोजन का उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते है| और यदि किसान साधारण यूरिया का प्रयोग करता है तो उसका अधिकांश भाग पौधों द्वारा उपयोग किये बगैर ही नष्ट हो जाता है।

नीम कोटेड यूरिया के लाभ :-
1. कृषि लागत में कमी।
2. किसानों की आय में वृद्धि।
3. 5 से 10 प्रतिशत तक यूरिया की बचत।
4. 10-16 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि एवं यूरिया का आयात भी कम होगा।
5. नाइट्रोजन के धीरे धीरे निकलने के कारण मृदा उर्वरा को मदद मिलती है।
6. नीम लेपित यूरिया का संतुलित इस्तेमाल यूरिया के गैर जरुरी इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा एवं पर्यावरण अनुकूल होगा।
7. उपज में वृद्धि के अलावा नीम लेपित यूरिया के उपयोग से धान एवं गेहूं की फसलों के अलावा अन्य फसलो को भी लाभ होगा।
8. यह नीम आयल की सुगंध से संभव हुआ है जो कि स्थिर पानी में विलय एवं कीटनाशी क्षमता के कारण है।
9. कीटो से होने वाले नुकसान में भी कमी आती हे।

Mr. Ravindra Meena, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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