बुवाई पूर्व खेत की तैयारी और उसका महत्व


परिचय- भूमि की तैयारी को जुताई अभ्यास भी कहा जाता है, यह फसलों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितिया प्रदान करने के लिए मशीनों या हलो द्वारा मिट्टी का चूर्णीकरण या मिटटी को उथल-पुतल किया जाता है। मृदा को कृषि का आधार या रीढ़ भी कहा जाता है, इसलिए खेती से पहले मृदा को तैयार करना बहुत आवश्यक होता है। बीज अंकुरण से लेकर पौधे के विकास तथा अधिक उत्पादन के लिए मृदा को तैयार करना काफी आवश्यक होता है।

मृदा की तैयारी का महत्व:-
उन सभी तत्वों का एक भंडार गृह हे जिनकी आवश्यकता बीज को अंकुरित करने से लेकर उनको विकास और लम्बाई बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन को बढ़ाने में भी सहायता करती हैं जैसे पोषक तत्व, कार्बनिक पदार्थ, वायु और पानी। मृदा पौधों की जड़ों के लिए भी सहायता प्रदान करती है, और पौधे जड़ों की सहायता से मृदा में नमी और पोषक तत्त्व ग्रहण कर सके।

सफल फसल उत्पादन के लिए मृदा कैसे तैयार करें:-
लगातार खेती के करने की वजह से मृदा अपनी उर्वरता शक्ति खो सकती हैं, मृदा की आवश्यकता की भरपाई के लिए, इसे बीज बोने से पहले तैयार किया जाता है।
कृषि में मृदा की तैयारी के प्रमुख तीन चरण हैं…
1. जुताई करना: इसमें मृदा का ढीलापन और खुदाई शामिल है। जुताई के दौरान, मृदा ढीली हो जाती है और गहरी मृदा में पोषक तत्व शीर्ष पर आ जाते हैं। इसके अलावा, मृदा का वातन बढ़ेगा और इस प्रकार साँस लेने के लिए हवा उपलब्ध होगी और जड़ें आसानी से मृदा के बीच जा सकती हैं। जुताई के अन्य उद्देश्य हैं खाद का एकीकरण, खरपतवारों को उखाड़ना, संक्रामक रोगजनकों और कीड़े को हटाना।
2. समतल करना: इससे वितरण में मदद मिलती है और जुताई के बाद मृदा को समतल किया जाता है। इसके लिए लकड़ी या लोहे की तख्ती का इस्तेमाल किया जाता है। भूमि को समतल करने से सतह द्वारा सिचाई करने पर पानी का वितरण सामान रूप से होता हैं और खेत में पानी का बहाव धीरे होने मृदा अपरदन कम हो जाता है।
3. खाद डालना : मृदा की जुताई और खेत को समतल करने के बाद उसमे अछि प्रकार से सड़ी हुयी खाद मिलायी जाती हैं, जिससे फसल की उचित वृद्धि में मदद मिलती है। मृदा की तैयारी कृषि क्षेत्र को उपजाऊ बनाती है जो आदर्श मृदा से युक्त होती है और इसे खेती के लिए तैयार करती है।

फसल उत्पादन में भूमि की तैयारी का महत्व-
एक अच्छी तरह से तैयार खेत खरपतवार को नियंत्रित करता है, पौधों के पोषक तत्वों को पुन: चक्रित करता है, और रोपाई के लिए एक नरम मृदा का द्रव्यमान प्रदान करता है। मिट्टी तैयार करने के कुछ अन्य लाभ निम्नलिखित हैं:
– मृदा में वायु को बढ़ावा देना
– बीज अंकुरण, पौधे और जड़ो के विकाश में सहायता करती हैं
– खरपतवार की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए
– मृदा में मौजूद रोग जनित विकारों के विकास को नियंत्रित करना
– मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का लाभ उठाने के लिए

Mr. Ravi SG Mahour, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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