गाय की देशी दुधारू उत्तम नस्ल – साहिवाल


आपको डेरी फार्म के लिये साहिवाल गाय किस प्रकार से काफी उपयुक्त है तथा इससे आपको कितना दूध प्रतिदिन प्राप्त हो जाता है तथा साथ ही डेरी फार्म चलाने वाले लोगो में इसकी काफी चर्चा है, क्योकि साहिवाल गाय सभी देशी गायों में सबसे ज्यादा दूध देती है |

आइये अब साहिवाल गाय के बारे में जान लेते है-:
► यह नस्ल पाकिस्तान के साहिवाल जिले में पाई जाती हें जिसे इस नस्ल का उत्पत्ति स्थान माना जाता हें | इसके बाद राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी जिलो में यह नस्ल पाली गई | इसके बाद राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, के कई जिलो में अन्य नस्लों को किनारा कर साहिवाल नस्ल को बढावा दिया जा रहा है|

► साहिवाल गाय का शरीर लम्बा तथा मांसल होता है, किन्तु उसके सिर छोटे होते है और साथ ही सिंग भी छोटे होते है |इसकी पूँछ का साइज़ थोडा छोटा होता है और पतला होता है| साहिवाल गाय का रंग हल्का लाल और गहरे भूरे रंग की होती है |

मुख्य विशेषताए:-
► इसकी कम होती संख्या के चलते चिंतित वैज्ञानिकों ने देशी नस्ल को साहिवाल में बदलने का कार्य किया जो पांचवी पीढ़ी में पूर्णत: साहिवाल में बदलने में कामयाबी प्राप्त की|

►साहिवाल गाय गर्म व ठन्डे वातावरण में भी अच्छा उत्पादन दे सकती है जिसके कारण इसे अन्य देशो- एशिया, अफ्रीका आदि देशो में भी निर्यात किया जाता है|

► साहिवाल नस्ल की गाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। ऐसे में यह गाय अनेक प्रकार की बीमारियों से जैसे थनेला से आसानी से लड़ लेती है। वहीं, यह गाय सर्द गर्म जलवायु को सहन कर लेती है। आने वाले वर्षो में बड़ा बदलाव दिखेगा |

► इस नस्ल की गाय की कीमत लगभग रु. 40000-60000 प्रति गाय हें| परन्तु इनकी कीमत दूध उत्पादन क्षमता, उम्र, व स्वास्थ्य पर भी निर्भर करती है|

► इसके दूध में अन्य नस्ल की गायो की अपेक्षा ज्यादा प्रोटीन व वसा पाई जाती हें तथा साहिवाल गाय के दूध में E2 बीटा क्लिजिन प्रोटीन पाई जाती है जो की संकर गाय और विदेशी गायो के दूध में नही पाई जाती |

► प्रजनन की अवधि में अन्तराल 12-15 महीने का होता है|

► प्रथम प्रजनन की उम्र 32 -36 माह की होती है|

►प्रतिदिन 12-16 लीटर प्रति दिन तक दूध देती है| यह मात्र कुछ कम व ज्यादा भी हो सकती है| (एक ब्यात = 300 दिन होता है|)

► इसकी खूबियों और दूध की गुणवता के चलते वैज्ञानिक इसे ज्यादा दुग्ध उत्पादक देसी गाय मानते है|

► साहीवाल गायों का परिपक्व वजन औसतन 425 किलोग्राम और बैल का वजन 500 किलोग्राम है।

► बरेली के अखा गांव में साहीवाल का 21 लीटर दूध एक दिन में रिकार्ड किया गया था। इसके दूध में पर्याप्त वसा होता है।

पशु के लिए आहार व्यस्था:-
आहार की वह मात्रा है जिसे पशु को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिया जाता है। इसे पशु अपने शरीर के तापमान को उचित सीमा में बनाए रखने, शरीर की आवश्यक क्रियायें जैसे पाचन क्रिया, परिवहन, श्वसन, उत्सर्जन आदि के लिए काम में लाता है। इससे उसके शरीर का वजन भी एक सीमा में स्थिर बना रहता है। चाहे पशु उत्पादन में हो या न हो परन्तु आहार को उसे देना ही पड़ता है इसके अभाव में पशु कमजोर होने लगता है जिसका असर उसकी उत्पादकता तथा प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इस में देशी गाय (जेबू) के लिए तूड़ी अथवा सूखे घास की मात्रा 4 किलो तथा संकर गाय, शुद्ध नस्ल की देशी गाय अथवा भैंस के लिए यह मात्रा 4 से 6 किलो तक होती है। इसके साथ पशु को दाने का मिश्रण भी दिया जाता है |

संतुलित आहार:-
खलियां (मूंगफली, सरसों, तिल, बिनोला, अलसी आदि)- 25-35 प्रतिशत मोटे अनाज (गेहूं, जौ, मक्की, ज्वार आदि) – 25-35 प्रतिशत अनाज के उप-उत्पाद (बाईप्रोडकक्ट) (चोकर, चून्नी, चावल की पोलिश आदि)- 10 – 30 प्रतिशत खनिज मिश्रण- 2 प्रतिशत आयोडीन युक्त नमक- 1 प्रतिशत विटामिन्स ए.डी.-3 का मिश्रण- 20-30 ग्रा.प्रति 100 किलो

साहिवाल गाय को होने वाले प्रमुख रोग के नाम:-
(क) विषाणु जनित रोग
1. मुहं व खुर की बीमारी
2. पशु प्लेग (रिन्ड़रपेस्ट):
3. पशुओं में पागलपन या हलकजाने का रोग (रेबीज)
(ख) जीवाणु जनित रोग
1. गलघोंटू रोग (एच.एस.):
(ग) अन्य
1. थनेला

Mr. Brahmanand Bairwa, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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