खेती और मानव स्वास्थ्य पर रसायनों के हानिकारक प्रभाव


परिचय- माना की रासायनिक उर्वरको से उत्पादन में वृद्धि होती हैं, परन्तु आज इन हानिकारक रसायनों का प्रयोग आवश्यकता से काफी अधिक हो गया हैं साथ ही इनके अति प्रयोग ने मिट्टी को कठोर कर दिया है, उर्वरता को कम कर दिया है, कीटनाशकों को मजबूत किया है, प्रदूषित हवा और पानी, और ग्रीनहाउस गैसों को छोड़ दिया है, जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। आज के समय पर किसानो द्वारा खेती में प्रयोग किये जाने वाले सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक फसलों और हमारे लिए नुकसानदायक ही होते हैं।

1. रसायनों के प्रयोग से मिट्टी हुई जहरीली: बाजारीकरण के इस दौर में उत्पादन बढ़ाने के लिए एक उम्मीद के रूप में रसायन नजर आया, जिसके नुकसान से किसान अंजान थे। इन खतरनाक रसायनों के कारण खेती की जमीन सूखती गई और लगातार प्रयोग से मिट्टी जल गई। और तो और रसायनों के प्रभाव से अनाज भी जहरीला हो गया। इस से किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि वे रसायनों के सीधे संपर्क में आने से कैंसर जैसी भयावह बीमारियों के चपेट में आ गये। हालांकि किसानों को गुमराह कर खाद और रसायन बेचने वाली फार्मा कंपनियों और अस्पताओं को खूब फायदा हुआ। और किसानों की स्थिति बद से बदतर होती चली गई।

2. खाना नहीं जहर खा रहे हैं: इन तमाम बातों से अनजान उपभोक्ता जहरीले फल और सब्जियों का बेहिचक प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनमें कई तरह की स्वास्थ सम्बंधित समस्याएं उत्पन्न हो रही है। कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि आजकल बीज को जहरीले रसायन में डीप कर के बीजारोपण किया जा रहा है और जब जमीन से छोटा सा पौधा अंकुरित होता है तो उस पर 8 बार रसायन छिडका जाता है। जब तक वो अन्न या सब्जी आपके किचन तक ना पहुंच जाए तब तक उस पर लगातार रसायनों का छिड़काव किसी न किसी रूप में होता रहता है।

3. बढ़ रहे हैं भयावह रोग: सब्जियों और अनाज के जरिए कई तरह के जहरीले रसायन हमारे रगों में दौड रहे हैं। इनको कितना भी धो लें, लेकिन ये हानिकारक रसायन शरीर के अंदर पहुंच ही जाएंगे। इससे कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्लड कैंसर) के रोगियों और मरने वालों की संख्या पिछले कुछ सालों में बढी है, और साथ ही कुछ सालों में हृदय रोग के आकडे भी बढे हैं। बच्चे, जवान बुढे कोई भी इन बीमारियों से अछुता नहीं है। लिवर की समस्या, आंतों को सिकुड कर पाचन क्रिया को बंद कर देना जैसी अनेक समस्याएं भी पिछले कुछ सालों में बढी है। यहीं नहीं इन रसायनों के प्रभाव से मानव के जींस में भी तब्दीली आ रही है। इंसान, जानवर, वर्यावरण सभी खतरे में हैं, इसकी वजह है बढते जा रहे बेहद हानिकारक रसायनों का उपयोग।

4. 100 सालों तक खत्म नहीं होता रसायनों का प्रभाव: डॉक्टर बैनर्जी कहते हैं कि एक बार इन रसायनो को छिडक दिया जाये तो इनका प्रभाव सालों साल खत्म नहीं होता। ऐसा नहीं है कि इन रसायनों से फसल ज्यादा या अच्छे उगते हैं, बस इतना है कि इनके प्रयोग से हानिकारक किट और कीडे जल्दी मर जाते हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाहते हैं। ये रसायन छिडकाव के दौरान हवा के जरिए हमारे सांस में पहुंचते हैं, भोजन के जरीए शरीर में और पानी के जरिए हमारे रगों में। ये पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक हैं। कई ऐसे पशु पक्षी जो इनवायरमेंट फ्रेंडली थे, आज वो इन किटनाशकों की भेंट चढ गए हैं।

Mr. Ravi Kr. Mahour, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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