आइये “नाबार्ड” और इसके प्रमुख कार्यों को जाने


परिचय-
नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) या राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक है, इसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में है। नाबार्ड 1982 में किसान सहायता और गरीबी में कमी के उद्देश्य के लिए अस्तित्व में आया। नाबार्ड एक प्रकार का विकास बैंक होता है जो कृषि के साथ-साथ लघु, कुटीर और ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प और ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य सभी प्रकार की संबद्ध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और विकास के लिए ऋण और अन्य सुविधाएं प्रदान करता हैं। देश में नाबार्ड के कई कार्यालय हैं जिनमें से प्रत्येक के पास कई विभाग हैं जो विशिष्ट उद्देश्यों और जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं। 30 मार्च 1979 को भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व सदस्य श्री बी. शिवरामन की अध्यक्षता में नाबार्ड को अस्तित्व में लाने के लिए समिति का गठन किया गया। नाबार्ड के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जी. आर. चिंताला हैं।

नाबार्ड का इतिहास: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) पहले सक्रिय रूप से कृषि वित्त से जुड़ा हुआ था जिसकी कार्यप्रणाली समय के साथ धीरे-धीरे कठिन होने लगी थी और कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम (ARDC) पुनर्वित्त की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ था। इन सभी परेशानियों की वजह से आरबीआई ने कृषि वित्त से दूर होने का निर्णय ले लिया और एक समिति गठित बनायीं गई, जो श्री शिवरामन के अधीन थी और वही इसके पहले अध्यक्ष थे। आगे चलकर शिवरामन समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को अपना लिया गया और फिर समिति की अनुशंसा पर 12 जुलाई 1982 को नाबार्ड का गठन किया गया। उस समय नाबार्ड के अध्यक्ष स्व. श्री एम. रामकृष्णय्या थे।

यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में है और इसका मुख्यालय मुंबई में हैं, साथ ही इसके 31 क्षेत्रीय कार्यालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं। नाबार्ड के अंतर्गत 3 प्रशिक्षण प्रतिष्ठान और जिला स्तर पर जिला विकास प्रबंधक बने हुए हैं।

नाबार्ड का विजन और मिशन
विजन:- किसानो को खेती में सहायता प्रदान करने के सरलता से और उचित ब्याजदर के साथ ऋण उपलब्ध करना हैं। नाबार्ड बैंक का प्रमुख विज़न “ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्र का विकास बैंक”।

मिशन:- समृद्धि हासिल करने के लिए सहभागी वित्तीय और गैर-वित्तीय हस्तक्षेप, नवाचारों, प्रौद्योगिकी और संस्थागत विकास के माध्यम से स्थायी और समान कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना।

नाबार्ड द्वारा निभाई जाने वाली प्रमुख जिम्मेदारियां :
यह बैंक ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, ग्रामीण लोगों और किसानो को खेती कार्यों और उनके जीवन को सुधारने के लिए ऋण उपलब्ध कराता है। ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के लिए महत्वपूर्ण बैंक है।

  • नाबार्ड ग्रामीण विकास के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यक्रमों क्रियान्वित करता हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान की दिशा में काम कर रही सभी संस्थानों के प्रशिक्षण में भी इसका योगदान हैं।
  • नाबार्ड कृषि क्षेत्र को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करता है।
  • यह कृषि के क्षेत्र में नीति, योजना और संचालन ’से संबंधित मामलों को देखता हैं।
  • नाबार्ड ग्रामीण भारत में अन्य विकासात्मक गतिविधियों से भी सम्बंधित हैं।
  • यह उन सभी संस्थानों को भी पुनर्वित्त करता है जो ग्रामीण क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
  • नाबार्ड राज्य सहकारी, जिला सहकारी, केंद्रीय और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की देखरेख करता है।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रमुख कार्य:
यह बैंक कृषि लघु और कुटीर उद्योग, ग्रामीण सिल्क उद्द्योग, हस्तशिल्प जैसे छोटे उद्योगों के लिए भी यह ऋण प्रदान करता है। 2005-2006 में नाबार्ड के द्वारा कुल स्वीकृत ऋण प्रवाह 1574800 मिलियन रुपए तक पहुंच गया था। इस बैंक की स्थापना के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों किसानों को ऊंचे ब्याज पर ऋण देने वाले साहूकारों की संख्या में बहुत तेजी से गिरावट देखि गयी गई है क्योकि अब सभी किसान नाबार्ड से ऋण प्राप्त कर रहे हैं। पहले ये साहूकार किसानों को बहुत ही ऊंची ब्याज दर पर कर्ज देते थे। नाबार्ड की स्थापना के बाद गरीब किसानों को बहुत राहत मिली है। अब उनका शोषण बंद हो गया है।
नाबार्ड की द्वारा 2010 में दिए कए कुल ऋण में प्रदत्त राशि 2,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। और वर्तमान में कृषि ऋण वितरण 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार है-
यह बैंक कृषि लघु और कुटीर उद्योग, ग्रामीण सिल्क उद्द्योग, हस्तशिल्प जैसे छोटे उद्योगों के लिए भी यह ऋण प्रदान करता है। 2005-2006 में नाबार्ड के द्वारा कुल स्वीकृत ऋण प्रवाह 1574800 मिलियन रुपए तक पहुंच गया था। इस बैंक की स्थापना के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों किसानों को ऊंचे ब्याज पर ऋण देने वाले साहूकारों की संख्या में बहुत तेजी से गिरावट देखि गयी गई है क्योकि अब सभी किसान नाबार्ड से ऋण प्राप्त कर रहे हैं। पहले ये साहूकार किसानों को बहुत ही ऊंची ब्याज दर पर कर्ज देते थे। नाबार्ड की स्थापना के बाद गरीब किसानों को बहुत राहत मिली है। अब उनका शोषण बंद हो गया है।
नाबार्ड की द्वारा 2010 में दिए कए कुल ऋण में प्रदत्त राशि 2,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। और वर्तमान में कृषि ऋण वितरण 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार है-

  • नाबार्ड वित्तीय योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्यान्वित करता है। यह राज्य सरकार, केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और दूसरी वित्त एजेंसियों के बीच सामंजस्य का कार्य करता है।
  • यह “विकास वाहिनी” स्वयंसेवक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी सहायता करता है जो गरीब किसानों को ऋण देने और किसान कल्याण का काम करते है।
  • नाबार्ड क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को लाइसेंस देने के लिए आरबीआई को सिफारिश भेजता है।
  • यह किसान कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम भी चलाता है जैसे किसानों को प्रशिक्षित करना।
  • नाबार्ड ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा बनाने के लिए “नाबार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट असिस्टेंट” (नीडा) की स्थापना की है।
  • यह देश के सभी जिलों के लिए सालाना ऋण योजनाएं बनाने के साथ-साथ ग्रामीण बैंकों में नये अनुसंधान का कार्य करता है। इसके अलावा कृषि अनुसंधान में भी मदद करता है।
  • बैंक कर्मियों की नियुक्ति के लिए देशभर में आयोजित होने वाली बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) परीक्षा में सही और योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करवाने में मदद करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सड़कों और पुलों के निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा, मिट्टी का संरक्षण, जल की परियोजनाएं जैसे कामों के लिए नाबार्ड बैंक ऋण उपलब्ध कराता है।
  • नाबार्ड ने ‘प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए छतरी सुरक्षा कार्यक्रम’ (यूपीएनआरएम) के तहत एक नयी प्रत्यक्ष ऋण सुविधा शुरू कर दी है।

Mr. Ravi Kumar Mahour, Assistant Professor, School of Agricultural Sciences, Career Point University, Kota

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